तंत्रवृक्षा
तंत्रवृक्षा
बुधवार, 19 अगस्त 2026
वीर सबल सिंह बावरी चालीसा
वीर सबल सिंह बावरी चालीसा
दोहा
मात् कपूरी लाड़ले, हेमराज के पूत।
वीर सबल सिंह बावरी सुमिरुं, भागें काल के दूत।
धन्य सबल सिंह वीर बावरी।
आया हंू बाबा शरण तुम्हारी ।1।
नाम तेरा सुनकर सब भागै।
कोई होय जो संकट भारी।।2।।
गुरू अवधूत नागा गुण ज्ञानी।
इनकी दया से भये वरदानी ।। 3।।
वीर बावरी सबल सिंह नामा ।
करो सदा भक्त्तन हित कामा ।।4।ं।
जो कोई नाम बावरी गावे ।
कर्म रोग संकट मिट जावे।। 5।।
जो कोई तुमरी महिमा गावै ।
संकट भीड़ निकट नहीं आवे ।।6।।
ऋद्धि सिद्धि तुम्हारी सब पावे ।
खङा रूप उसको दिख जावे ।। 7।
खाकी वरदी टांग दुनाली ।
तेरे भग्तों की सदा दीवाली ।। 8।।
घट घट के हो अंतर्यामी ।
जिन्द भूत करे परनामी ।। 9।।
घोङे उपर आप विराजे ।।
कान्धे अंग दुनाली साजे ।। 10।।
खाकी वर्दी अति सुन्दर साजे।
शीश कटा रण छोड़ ना भाजे।11।
तुम सम देव और नहीं दूजा ।
गुरू वरदान से होती पूजा।12।
जो कोई घ्यान धरे मन माहीं
परचा तुरत मिले पल माहीं ।।13।।
घोडे चिट्टे के असवारा।
तेरी महिमा अपरंमपारा ।।14।।
पांच बावरी रण में ललकारे।
भक्त लगावें जय जय कारे।।15।।
नरसी पाडें की सांग उठाई।
तभी वीर से हुई मिताई।।16।।
घोडे से घोडा टकराया।
चैथा कींगरा वर में पाया।।17।।
गोगा जी तुम को वर दीन्हा।
छप्पन कलुवे भेंट में दीन्हा।।18।।
भ्रात बडे़ पद तुम को दीन्हा।
मिलकर मुगलों की नाड़ उखाड़ी।।19।।
जब जोडे में रैपा आया ।
नाहन का सब कष्ट मिटाया।।20।।
कलियुग में तेरी होती पूजा।
तुम सम दयावान नही दूजा।।20।।
श्याम कौर संग जोडा साजै ।
भोग पान लड्डूवन को लागै ।।21।।
चार वरण तुझे शीश झुकावे।
हर कोई मन ईच्छित फल पावै।।22।
पत्थर पर तूं फूल उगावे।
तली घरी सरसों उग जावै।।23।।
घर घर तेरी हो रही पूजा।
तुम सम वरदानी ना दूजा।।24।।
नागे गुरू ने कौतक कीन्हा।
नाम अमर बावरी को कीन्हा।।25।।
नित हुक्का भरे जो सेवे तोय।
सेना पुलिस में भरती होय।।26।।
भक्तन को लीला दिखलाता।
कोतवाल को रूप धर आता।।27।।
बंदी पडे को तूं छुडवाता।
तेरे गुण हर कोई गाता ।।28।।
सिगरेट पव्वा लड्डूवन को भोग।
काटे पीड़ा अरू सारे रोग ।।29।।
भीड़ पडे जब सुमिरे कोई।
पवन रूप धर झट् पहुंचे तेई।।30।।
बांझन के घर पूत खिलावे।
वीर बावरी झट कला दिखावे।।31।।
सूतक पातक कबहूं ना मानी ।
महिमा तेरी सकल जग जानी।।32।।
तेरे नागा गुरू पंथ प्रकाशी।
सबल सिंह वीर सकल गुण राशी ।।33।।
होम् भोग रविवार लगावे।
सब वरदान वो तुम से पाये।।35।।
जो कोई घर डेरू बजवावे।
नाथों को भोजन करवावे।।36।।
ध्यान धरे नित बावरी वीर का।
कष्ट मिटे उसके शरीर का ।।37।।
छत्तीस जात है धोक लगाती।
तेरे दरबार में शीश झुकाती ।।38।।
जो कोई यह चालीसा गावे।
दूध पूत वर तुम ते पावे ।।39।।
जो कोई यह चालीसा पढ़े धरे नित्य ही ध्यान
उसके हृदय में खुद बसे सबल सिंह बलवान।।40।।
शनिवार, 11 अप्रैल 2026
अप्रकाशित मंत्रों का संग्रह
हमारी पुस्तक बावन डोरी प्रकाशित हो चुकी है अतः जिस किसी को यह पुस्तक लेनी हो काव्य पब्लिकेशन के माध्यम से फ्लिपकार्ट या अमेजॉन के माध्यम से वह यह पुस्तक ऑनलाइन प्राप्त कर सकता है।
सोमवार, 17 जून 2024
कलवा वशीकरण।
जीवन में कभी कभी ऐसा समय आ जाता है कि जब न चाहते हुए भी आपको कुछ ऐसे काम करने पड़ जाते है जो आप कभी करना नही चाहते।
यहाँ मैं स्पष्ट रूप से कह देता हूँ कि मैं वशीकरण के मन्त्र और प्रयोग के वाल विषय पूर्ति के लिए ही देता हूँ।और व्यक्तिगत रूप से ऐसे प्रयोग का समर्थन नहीं करता।
तंत्र अपने आप में समग्र औषध है लेकिन इसका अनुचित प्रयोग करना अक्सर बहुत भारी पड़ जाता है एक कहावत आपने सुनी ही होगी
"पहले मज़ा फिर सजा"
लेकीन जब आप तंत्र का गलत प्रयोग करते हैं तो ये कहवात इस तरह हो जाती है
"ना मज़ा फिर भी सारा जीवन सज़ा"।
अनैतिक कार्य करने में पहले पहले आपको अच्छा लगेगा लेकिन आपके ऊपर से शुद्ध दैविक ऊर्जा का आशीर्वाद सदा सर्वदा के लिए समाप्त हो जाएगा ये मैने अपने जीवन में बहुत सारे तांत्रिकों के जीवन में होता हुआ देख है और अनेकों बार देखा है।
मूलतः कोई भी साधक किसी भी साधना को केवल फल प्राप्ति हेतु करता है इसमें कोई संदेह नही किन्तु कब आपको किस शक्ति /प्रयोग को किसी के ऊपर प्रयोग करना है अथवा कब नही ये निर्धारित करना उस समय बहुत मुश्किल होता है अगर बुराई वाला काम करना हो तो उससे पहले 100 बार सोचना चाहिए लेकिन अगर किसी का भला करना हो तो आपको 1 बार भी सोचना नही चाहिए।
तंत्र विद्या में षट कर्म बहुत उग्र कर्म होता है केवल अपने प्राण और अस्तित्व को संकट में जान पड़ने पर ही इनका प्रयोग करना उचित है अन्यथा नही।
आज कल मनुष्यों के मन में स्वर्थ एवं स्वयं के लिए महत्वाकांक्षा ही भरी पड़ी है।
और संबंधों का कोई स्तर नही बचा मानो एक ही समय में चारों युगों झलक दिखायी देती है जब कोई परोपकार की घटना देखते हैं तो ये लगता है कि चारों तरफ़ धर्म स्थापित है लेकिन अक्सर स्वार्थ चपलता और क्रूरता के दर्शन लगातार देखते रहते हैं।
एक प्रयोग मैं आपको यहां पर बता रहा हूँ यदि कोई वशीकरण का काम फंस जाए और आपको किसी का घर बचाना है तो निम्नलिखित प्रयोग को करें।
शनिवार रात को जिसका वशीकरण आपने करना है उस के पहने हुए कपड़े का टुकड़ा चुपचाप प्राप्त कर लें ।
चौदस/ अमावस /शनिवार की अर्ध रात्रि में कलवावीर को शमशान भूमि में देशी शराब, नारियल, पान, 7 प्रकार की मिठाई, बकरे की कलेजी, लौंग,इलायची,11 नींबूओं का भोग दें और फिर उस कपड़े से एक गुड़िया का निर्माण करें:-
ॐ नमो आदेश गुरु को
काला कलवा काली रात
मैं बुलवां आधी रात
जाग जाग रे *****
भन्न सुट्ट
( फलाने)की हड्डियां
दिल कलेजा चीर
मुठ्ठी भरी **** दी
चौसठ चलन जोगन
चल्लन बावन वीर
दुहाई काली कंकाली की
दुहाई गुरु गोरखनाथ की
आदेश आदेश आदेश।
जिसका वशीकरण करना चाहते हैं उसके पहने हुए कपड़े से निर्मित गुड़िया की 501 मन्त्र से अभिमंत्रित करें फिर कपड़े सिलने वाली तीन सुइयां ले ले और उन प्रत्येक सूई की 11 बार मन्त्र से अभिमंत्रित करें जिसका वशीकरण करना है उसका ध्यान करें पहली सूई को दिमाग और दूसरी सूई को दिल तथा तीसरी सूई की नाभि पर मंत्र पढ़ते हुए प्रवेश करवा और उसे पुतले को चुपचाप किसी मिट्ठी के पात्र में डालकर श्मशान भूमि में गाड़ दे।
यह प्रयोग मैंने आपको उचित कार्यों में प्रयोग करने के लिए दिया है इसके लिए किंचित मात्र भी किसी को अपने स्वार्थ के लिए या किसी ऐसी अनुचित कार्य के हेतु दूसरे को कष्ट पहुंचाने का कोई भी हक नहीं है इस प्रयोग को प्रयोग करने वाले व्यक्ति की स्वयं की जिम्मेदारी होगी।
इस मंत्र के कुछ अंश सुरक्षित रखे गए हैं ताकि किसी प्रकार से किसी का कोई अहित न हो।
जो इसका प्रयोग करना चाहते हैं वह सीधा मुझे मेरे व्हाट्सएप नंबर 8194951381 के ऊपर व्हाट्सएप संदेश के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं
गुरुवार, 22 फ़रवरी 2024
श्री झूलेलाल चालीसा।
"झूलेलाल चालीसा"
मन्त्र :-ॐ श्री वरुण देवाय नमः ॥
श्री झूलेलाल चालीसा
दोहा :-जय जय जय जल देवता, जय जय ज्योति स्वरूप। अमर उडेरो लाल जय,जय जय श्री झूले लाल अनूप।।
चौपाई
रतनलाल रतनाणी नंदन ।
जयति देवकीसुत जगवंदन ॥1।।
दरियाशाह वरुण अवतारी ।
जय जय लाल साईं सुखकारी ॥2।।
जय जय होय धर्म की भीरा ।
जिंदा पीर हरे जन पीरा ॥3।।
संवत दस सौ सात मंझारा ।
चैत्र शुक्ल द्वितिया के वारा ॥4॥
ग्राम नसरपुर सिंध प्रदेशा ।
प्रभु अवतरे सब मिटे क्लेशा ॥5।।
सिन्धु वीर ठट्ठा रजधानी ।
मिरखशाह नृप अति अभिमानी ॥6।।
कपटी कुटिल क्रूर कुविचारी ।
यवन मलिन मन अत्याचारी ॥7।।
धर्मान्तरण करे सब केरा ।
दुखी हुए जन कष्ट घनेरा ॥8॥
पिटवाया हाकिम ढिंढोरा ।
हो इस्लाम धर्म चहुँओरा ॥9।।
सिन्धी प्रजा बहुत घबराई ।
इष्ट देव को टेर लगाई ॥10।।
वरुण देव पूजे बहुभांति ।
बिन जल अन्न गए दिन राती ॥11।।
सिंधु तीर तब दिन चालीसा ।
सब घर ध्यान लगाये ईशा ॥12॥
गरज उठा नद सिंधू सहसा ।
चारों और उठा नव हरषा ॥13।।
वरुणदेव ने सुनी पुकारा ।
प्रकटे वरुण मीन असवारा ॥14।।
दिव्य पुरुष जल ब्रह्म स्वरुपा ।
कर पुस्तक नवरूप अनूपा ॥15।।
हर्षित हुए सकल नर नारी ।
वरुणदेव की महिमा न्यारी ॥16॥
जय जय कार उठी चहुँओरा ।
गई रात आई नव भोरा ॥17।।
मिरख नृपौ जो अत्याचारी ।
नष्ट करूँगा शक्ति सारी ॥18।।
दूर अधर्म करन भू भारा ।
शीघ्र नसरपुर में अवतारा ॥19।।
रतनराय रतनाणी आँगन ।
आऊँगा उनका शिशु बनकर ॥20॥
रतनराय घर खुशियां आई ।
अवतारे सब देय बधाई ॥21।।
घर घर मंगल गीत सुहाए ।
झुलेलाल हरन दुःख आए ॥22।।
मिरखशाह तक चर्चा आई ।
भेजा मंत्रि क्रोध अधिकाई ॥23।।
मंत्री ने जब बाल निहारा ।
धीरज गया हृदय का सारा ॥24॥
देखि मंत्री साईं की लीला ।
अति विचित्र मनमोहनशीला ॥25।।
बालक दिखा युवा सेनानी ।
देख मंत्री बुद्धि चकरानी ॥26।।
योद्धा रूप दिखे भगवाना ।
मंत्री हुआ विगत अभिमाना ॥27।।
झुलेलाल तब दिया आदेशा ।
जा तव नऊपति कह संदेशा ॥28॥
मिरखशाह कह तजे गुमाना ।
हिन्दू मुस्लिम एक समाना ॥29।।
बंद करो नित अत्याचारा ।
त्यागो धर्मान्तरण विचारा ॥30।।
लेकिन मिरखशाह अभिमानी ।
वरुणदेव की बात न मानी ॥31।।
एक दिवस हो अश्व सवारा ।
झुलेलाल गए दरबारा ॥32॥
मिरखशाह ने आज्ञा दे दी ।
झुलेलाल बनाओ बन्दी ॥33।।
किया स्वरुप वरुण का धारण ।
चारो और हुआ जल प्रलय ॥34।।
दरबारी तब डूबे उतराये ।
नृप के होश ठिकाने आये ॥35।।
मिरख शाह तब शरणन आई ।
बोला धन्य धन्य जय साईं ॥36॥
वापिस लिया नृप निज आदेशा ।
दूर हुआ सब जन का क्लेशा ॥37।।
संवत दस सौ बीस मंझारी ।
भाद्र शुक्ल चौदस शुभकारी ॥38।।
भक्तों की हर विपदा व्याधि ।
जल में ली जलदेव समाधि ॥39।।
जो जन धरे आज भी ध्याना ।
श्रीझूलेलाल करें कल्याणा ॥40॥
॥ दोहा ॥
यह चालीसा पढ़े जो कोई उसका जीवन सुखमय होई।
दिन चालीस करे व्रत जोई मनवांछित फल पावै सोई।। ॥
गुरुवार, 8 फ़रवरी 2024
सिद्ध सुलेमानी जंजीरा मन्त्र
सुलेमानी जंजीरा मन्त्र।
जहां सभी तंत्रों में सुलेमानी तंत्र को बहुत तीव्र और शक्तिशाली माना जाता है। क्योंकि इसमें सिद्धि शीघ्र और तेज होती है। ऐसा नहीं है कि बाकी प्रणाली प्रभावी नहीं है, क्यों कि तंत्र का अर्थ क्रिया है। जहां प्रार्थना का जाप किया जाता है। और व्यवस्था एक क्रिया, समस्या का निवारण करती है। क्योंकि क्रिया का अर्थ काम हुआ। इसलिए तन्त्र समस्या के लिए झुकना नहीं चाहिए। जहाँ मैं एक बहुत ही प्रभावी सुलेमानी मन्त्र आपको दे रहा हूँ जो बहुत आसान भी है।लेकिन धैर्य के साथ किया गया अनुष्ठान आपको 101% लाभ देगा।
सुलेमानी तंत्र साधना –
क्या आपको भी निम्नलिखित परेशनिया है?
क्या आप पूरी तरह से गुरवत से घिरे हुए हैं?
क्या आप कर्ज में डूब रहे हैं?
क्या दुश्मन की साजिश के शिकार लोगों को शिकार बनाया जा रहा है?
क्या सभी रोजगार के रास्ते बंद हैं?
इसलिए इस साधना को एक बार करें और फिर देखें कि आपके जीवन में कितना बदलाव आता है। यह एक बहुत ही ज़बरदस्त पंजतन पाक कलाम है। इसे पूरी पवित्रता के साथ करें।
जिस कमरे में आप साधना कर रहे हैं, उसे साफ करें, इसे पोचा वगैरह लगाके निश्चित रूप में धोएं, फिर इस साधना को शुक्ल पक्ष के पहले जुमेरात से शुरू करें और इसे 21 दिनों तक करना है।
सुलेमन जंजीरा:-
स्नान इत्यादि से निवर्त होकर सेंट लगाये
सफेद कपड़े पहनें और आसन भी सफेद रंग का प्रयोग करें।
इस साधना के दौरान पश्चिम दिशा की ओर रुख कर के जैसे वज्रासन में बैठते हैं ।
सिर की टोपी को सफेद रूमाल से ढककर बैठना चाहिए और खुशबूदार अगरवती / या लोहबान सुलगाना चाहिए और इसे जाप के दौरान जलते रहना चाहिए।
सफेद रंग की मिठाई जाप के समय थोड़ी सी सामने रखे फिर उसे दूसरे दिन बच्चों में बांट दें/नदी या दरिया में प्रवाहित करें अथवा गाय या कुत्ते को डाल दें।
अगर आप लगाना चाहते हैं तो तेल का दीपक लगा सकते हैं।
सभी पहले गुरु और गणेश की पूजा करने के बाद आज्ञा लें और
फिर एक माला गुरु मंत्र की और एक माला गणेश मन्त्र की करें बाद में सफेद हकीक माला के साथ निम्न मंत्र की पांच माला का जप करें,
साधना में बहुत अनुभव हो सकता है। मन को नियंत्रण में रखते हुए जप पूरा करें।
जिस कमरे में आप साधना कर रहे हैं उसमें किसी को भी इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि वे शराब पीकर न आएं।
यदि आप माला के साथ जाप नहीं करते तो इसे एक घंटे के लिए करें।
सुलेमानी जंजीरा:-
बिसिमिल्ला रहमान रहीम,
उदम बीबी फातमा,
मदद शेर खुदा ,
चड़े मोहमंद मुस्तफा,
मूजी कीते जेर ,
वरकत हसन हुसैन दी,
रूह असा वल फेर।
आपका कल्याण हो।
गुरुवार, 7 दिसंबर 2023
नाहर सिंह वीर की साधना।
नाहर सिंह वीर की साधना।
नाहर सिंह वीर की एक ऐसी जबरदस्त और खतरनाक मन्त्र साधना है जिसमें साधक को बहुत ही अधिक शक्तिशाली एवं रोमांचकारी अनुभवों से होकर गुजरना पड़ता है।
लेकिन इस साधना को सफलतापूर्वक संपन्न कर लेने के बाद आप कट्टर से कट्टर भूत प्रेत को जिन जिन्नाद शैतान या ख़बीस को भगाने की शक्ति प्राप्त कर लेते हैं जिन नवयुवक बच्चों के साथ रात्रि में विपरीत लिंगी ऊर्जाओं द्वारा जबरन बलात्कार होता है उन बच्चों के लिए ये मन्त्र बहुत ही अत्यंत उपयोगी हैं।
किसी भी प्रकार की मनोकामना की पूर्ति इस मंत्र की साधना कर लेने के बाद आपको प्राप्त हो जाती है तथा आपके जीवन में आने वाली सभी भूत प्रेत जनित बढ़ाएं स्वत संपूर्ण रूप से समाप्त हो जाती हैं
अगर आप किसी इस प्रकार की शक्ति से बाधित हैं और आपको पता है कि वह शक्ति एक शुद्ध बड़ा है और आपको बहुत अधिक संत्रास कष्ट दे रही है आपका शोषण हो रहा है तो उसे स्थिति में यह मंत्र आपकी बहुत अधिक सहायता कर सकता है विशेष तौर पर युवक और नव युवतियों को विपरीत लिंगी भूत प्रेत अक्सर बहुत अधिक पीड़ा देते हैं यहां तक की जबरन मजबूर होना पड़ता है ऐसी नीचे वृद्धि वाली शक्तियों को निवारण के लिए या मंत्र उसकी साधना बहुत अधिक कारगर है इस मंत्र को कई बार आजमाया जा चुका है यह मंत्र एक बहुत अच्छे महात्मा से प्राप्त हुआ था विपरीत लिंगी भूत प्रेत द्वारा युवक और नवयुवतियों के साथ होने वाले जबरन सहवास करने वाली शक्तियों को नष्ट करने के लिए मात्र 51 बार पढ़ लेना ही काफी रहता है
हां अगर कोई व्यक्ति 108 बार प्रतिदिन जाप करें पास मछली अंडा शराब इत्यादि वस्तुओं से दूर रहे तो यह मंत्र अपनी पूर्ण प्रचंड वेग के साथ साधक की सभी समस्याओं का निवारण करता है।
इस साधना में रक्षा के लिए रुद्रअवतार श्री हनुमान जी के चालीसा का पाठ आपको प्रत्येक मंगलवार वाले दिन सात बार करना चाहिए ये लगातार पांच मंगलवार करें ,तो इस साधना से जो गरमाइश पैदा होगी वह गरमाइश शांत रहेंगी और ऊर्जा के सक्रिय होने पर आपको किसी प्रकार की मानसिक और शारीरिक हानि नहीं होगी।
सभी भूत प्रेत ग्रसित रोगियों के उपचार के लिए नाहर सिंह हनुमान और भैरव की शक्तियां अचूक मानी जाती हैं यही तीन शक्तियों है जिसे बड़े से बड़ा भूत प्रेत भी चिल्लाने लग जाता है और रोगी को छोड़ देने पर मजबूर हो जाता है।
बाकी सब बात होती है विश्वास की।
आप कोई भी छोटी से छोटी या बड़ी से बड़ी साधना करें आपके गुरु या उस्ताद का आपके सिर पर हाथ होना परम आवश्यक है ऐसा न होने पर आप कितने भी स्तर की ऊर्जा को प्राप्त कर लें या किसी भी प्रकार की सिद्धि हासिल कर ले तब भी आपको खतरा ही रहेगा। क्योंकि साधनाओं में भारी किया होती हैं और गुरु उस्ताद को वह बारीकियां पता होती हैं।
अपने गुरु और उस्ताद के अलावा दूसरा कहीं से मंत्र लेकर के साधना अथवा सिद्धि के लिए नहीं बैठना चाहिए क्योंकि सभी साधकों के अपनी अपनी शैलियां और अपनी-अपनी अलग अलग पद्धतियां होती हैं।
यह मंत्र सिद्ध और सक्रिय है 108 बार इस मंत्र को जब करने पर इसकी शक्ति का अनुभव आपको हो जाएगा।
मत्थे टिक्का
हत्थ विच कड़ा
जिथे सिमरां नाहर सिंह वीर
हज़ार खड़ा
सवा मण का सोटा चलाओ
लड्डू पेड़े का भोग लगाओ
भूतां प्रेतां नु मार लगाओ
माता नाहरी दी आन
दूहाई सोढ़ी सरकार दी
दुहाई गुरु उस्ताद दी
इस मंत्र की साधना साधक के सभी समस्याओं का निवारण करती है । किंतु आपके ऊपर आपके गुरु जी के आशीर्वाद का होना परम आवश्यक है। अपने से गुरु से आज्ञा लेकर ही इस मंत्र का अनुष्ठान शुरू करें।
लगातार 40 दिन तक एक माला प्रतिदिन जाप करने के बाद सड़क के ऊपर वीर नाहर सिंह की विशेष कृपा होती है। एवं दर्शन प्राप्त होते हैं।
इस साधना में नाहर सिंह वीर को दिए जाने वाला भोग लड्डू पेड़ा बर्फी लौंग इलायची और शुद्ध देशी घी के हलवे की कड़ाही है।
जिन लोगों के घरों में नरसिंह वीर की जोत चलती है उन घरों में ये मन्त्र बहुत कारगर होता है।
लोना चमारी का मन्त्र।
लोना चमारी का मन्त्र।
( यह लोना चमारी का मंत्र अधिकतर रूप से बहुतायत में सिद्ध हो जाता है किसी किसी स्थिर मन वाले और स्थिर ध्यान वाले साधकों को ही इनके दर्शन प्राप्त होते हैं वरना मंत्र 100% सिद्ध हो जाता है और कार्य करता है )।
माता लोना चमारी को तंत्र के क्षेत्र में कौन नही जानता गुरु गोरखनाथ जी की शिष्या अपार शक्तियों की मालिक अगर किसी पर एक नज़र कृपा की कर दें तो साधक यन्त्र मन्त्र तन्त्र में पारंगत हो जाता है।
ये मन्त्र यहाँ पर बताने का कोई विचार नही था लेकिन बार बार शिष्यों के आग्रह करने पे ये मन्त्र यहां बता रहा हूँ इस लिए की समाज का कुछ भला हो सके और जो वास्तव में इस मंत्र के पात्र हैं उन्हें ये मन्त्र मिल सके।
जिस प्रकार श्री गुरु गोरक्षनाथ जी की साधना से साधक आध्यात्मिक शक्तियां प्राप्त कर लेता है उसी प्रकार ये साधना सम्पन्न कर लेने पर अज्ञानी से अज्ञानी साधन भी यन्त्र मन्त्र तन्त्र में पारंगत हो जाता है।
इस मंत्र के सिद्ध हो जाने के बाद मनुष्य को बड़े बड़े मन्त्र और स्तोत्र कंठ और सिद्ध हो जाते है और तंत्र जगत के गुप्त रहस्यमयी विषयों के बारे में प्रकाश/ ज्ञान हो जाता है और सभी कठिन से कठिन साधनाओं में आने वाली समस्याओं का निवारण गुप्त रूप से चल जाता है और आध्यामिक दृष्टि से साधक आगे बढ़ जाता है ।
इस साधना को करने के बाद साधक की छठी इंद्रिय शक्ति इस प्रकार जागृत होती है कि उससे होने वाली सभी घटनाओं का पूर्व में ही ज्ञान हो जाता है और संकेतिक रुप से सभी होने वाली बातें उसके सामने दृष्टांत बनकर आंखों के सामने दिखने लग जाती है ।
इस साधना को करने के उपरांत साधन में साधक में अजीब से जीवनी शक्ति का संचार हो जाता है वह हर साधना को चाहे वह कितनी भी कठिन या जटिल क्यों ना हो सफलतापूर्वक संपन्न करने में सक्षम हो जाता है चाहे झाड़-फूंक हो या टोना टोटका यंत्र मंत्र तंत्र या कोई भी कठिन से कठिन साधना साधक आसानी से उनको कर लेता है।
साधक का वचन वांचा इतना पक्का हो जाता है जिस प्रकार उसे वचन सिद्धि प्राप्त हो जाए एवं साधक मजाक में भी कोई बात कह देगा तो वह वाक्य सत्य होगी इसलिए इस साधना को करने के बाद साधक को बोलने में संयम का प्रयोग करना चाहिए ताकि आपके द्वारा किसी जीव मात्र का बुरा ना हो।
जो लोग दूसरों का इलाज करते हैं झाड़-फूंक का कार्य करते हैं उनको अपने मंत्रों के प्रयोगों में इस लक्ष्य प्राप्त होने लग जाता है और दीन दुखी जो उसके पास आते हैं वह सब ठीक होने लग जाते हैं। झाड़ फूंक में बहुत असर आ जाता है।
इस मंत्र की साधना 41 दिनों की है और उसे संयम से किया जाना चाहिए लाल वस्त्र पहनकर लाल ही आसन पर और मूंगे की माला से इस मंत्र को किया जाता है पूजन सामग्री में धूप दीप फल फूल पांच मिठाई और नैवेद्य दिए जाते हैं इसका रात्रि में संपर्क किया जाता है जिसमें प्रतिदिन आपको पांच माला जाप करना होता है जाप करते समय पूर्व दिशा की तरफ अपना मुंह रखें सिरको और माला को ढक कर रखें एक गाय के गोबर के उपले के आग बना ले उस पर थोड़ा देसी घी बताशा और एक जोड़ा लॉन्ग प्रति मंत्र को पढ़ने के बाद आहुति दें ब्रम्हचर्य से रहें और भूमि पर शयन करें इस प्रकार 41 दिन करने से यह साधना संपन्न हो जाएगी शुरुआती दिनों में शक्तियां आप से चल कर सकती हैं इसलिए आपको सजग रहना चाहिए और किसी भ्रांति में नहीं पड़ना चाहिए इस साधना में कोई भरे इत्यादि नहीं होता है लेकिन देवी अन्यान रूप बनाकर के साद साधक को भ्रमित कर सकती हैं।
इसका मंत्र और विधि मैं आपको दे रहा हूं ऊपर बताई गई विधि के अनुसार निम्न मंत्र का जाप किया जाता है।
ॐ नमो लोना चमारी ,मात हमारी,भेंट तुम्हारी लौंग सुपारी,श्री सतगुर दीन्हा वाक, ठाड़ी खड़ो अब आय भवानी,मन्त्र विद्या सिद्ध कराओ,कामरू कामाक्षा देवी का वचन छूटे तो गुरु उस्ताद की दुहाई इस्माईल योगी की दुहाई। सतगुरु गोरक्षनाथ की आन।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
वीर सबल सिंह बावरी चालीसा
वीर सबल सिंह बावरी चालीसा दोहा मात् कपूरी लाड़ले, हेमराज के पूत। वीर सबल सिंह बावरी सुमिरुं, भागें काल के दूत। धन्य सबल सिंह वीर बावरी। आय...
-
।। माता मदानण का चालीसा ।। ।। दोहा।। चालीसा मैं शुरू करूं करूँ ज्ञान की बात ।...
-
नमस्कार दोस्तों आप सब के लिए एक बार फिर में उपस्थित हुआ है काले इल्म के अंतर्गत आने वाले ख्वाजा साहब जिद पीर की साधना के सिद्ध क...
-
****।।। सन्तान प्राप्ति।।।**** जैसे बिना पानी के सागर नहीं हो सकता,बिना जल के मेघ नहीं हो सकता, जैसे राजहंस के ब...
