बुधवार, 19 अगस्त 2026

वीर सबल सिंह बावरी चालीसा

वीर सबल सिंह बावरी चालीसा दोहा मात् कपूरी लाड़ले, हेमराज के पूत। वीर सबल सिंह बावरी सुमिरुं, भागें काल के दूत। धन्य सबल सिंह वीर बावरी। आया हंू बाबा शरण तुम्हारी ।1। नाम तेरा सुनकर सब भागै। कोई होय जो संकट भारी।।2।। गुरू अवधूत नागा गुण ज्ञानी। इनकी दया से भये वरदानी ।। 3।। वीर बावरी सबल सिंह नामा । करो सदा भक्त्तन हित कामा ।।4।ं। जो कोई नाम बावरी गावे । कर्म रोग संकट मिट जावे।। 5।। जो कोई तुमरी महिमा गावै । संकट भीड़ निकट नहीं आवे ।।6।। ऋद्धि सिद्धि तुम्हारी सब पावे । खङा रूप उसको दिख जावे ।। 7। खाकी वरदी टांग दुनाली । तेरे भग्तों की सदा दीवाली ।। 8।। घट घट के हो अंतर्यामी । जिन्द भूत करे परनामी ।। 9।। घोङे उपर आप विराजे ।। कान्धे अंग दुनाली साजे ।। 10।। खाकी वर्दी अति सुन्दर साजे। शीश कटा रण छोड़ ना भाजे।11। तुम सम देव और नहीं दूजा । गुरू वरदान से होती पूजा।12। जो कोई घ्यान धरे मन माहीं परचा तुरत मिले पल माहीं ।।13।। घोडे चिट्टे के असवारा। तेरी महिमा अपरंमपारा ।।14।। पांच बावरी रण में ललकारे। भक्त लगावें जय जय कारे।।15।। नरसी पाडें की सांग उठाई। तभी वीर से हुई मिताई।।16।। घोडे से घोडा टकराया। चैथा कींगरा वर में पाया।।17।। गोगा जी तुम को वर दीन्हा। छप्पन कलुवे भेंट में दीन्हा।।18।। भ्रात बडे़ पद तुम को दीन्हा। मिलकर मुगलों की नाड़ उखाड़ी।।19।। जब जोडे में रैपा आया । नाहन का सब कष्ट मिटाया।।20।। कलियुग में तेरी होती पूजा। तुम सम दयावान नही दूजा।।20।। श्याम कौर संग जोडा साजै । भोग पान लड्डूवन को लागै ।।21।। चार वरण तुझे शीश झुकावे। हर कोई मन ईच्छित फल पावै।।22। पत्थर पर तूं फूल उगावे। तली घरी सरसों उग जावै।।23।। घर घर तेरी हो रही पूजा। तुम सम वरदानी ना दूजा।।24।। नागे गुरू ने कौतक कीन्हा। नाम अमर बावरी को कीन्हा।।25।। नित हुक्का भरे जो सेवे तोय। सेना पुलिस में भरती होय।।26।। भक्तन को लीला दिखलाता। कोतवाल को रूप धर आता।।27।। बंदी पडे को तूं छुडवाता। तेरे गुण हर कोई गाता ।।28।। सिगरेट पव्वा लड्डूवन को भोग। काटे पीड़ा अरू सारे रोग ।।29।। भीड़ पडे जब सुमिरे कोई। पवन रूप धर झट् पहुंचे तेई।।30।। बांझन के घर पूत खिलावे। वीर बावरी झट कला दिखावे।।31।। सूतक पातक कबहूं ना मानी । महिमा तेरी सकल जग जानी।।32।। तेरे नागा गुरू पंथ प्रकाशी। सबल सिंह वीर सकल गुण राशी ।।33।। होम् भोग रविवार लगावे। सब वरदान वो तुम से पाये।।35।। जो कोई घर डेरू बजवावे। नाथों को भोजन करवावे।।36।। ध्यान धरे नित बावरी वीर का। कष्ट मिटे उसके शरीर का ।।37।। छत्तीस जात है धोक लगाती। तेरे दरबार में शीश झुकाती ।।38।। जो कोई यह चालीसा गावे। दूध पूत वर तुम ते पावे ।।39।। जो कोई यह चालीसा पढ़े धरे नित्य ही ध्यान उसके हृदय में खुद बसे सबल सिंह बलवान।।40।।

वीर सबल सिंह बावरी चालीसा

वीर सबल सिंह बावरी चालीसा दोहा मात् कपूरी लाड़ले, हेमराज के पूत। वीर सबल सिंह बावरी सुमिरुं, भागें काल के दूत। धन्य सबल सिंह वीर बावरी। आय...