**।।सरस्वती साधना।।**
○जैसा कि आप सभी साधकों को पता है । की प्राचीन समय में जो ऋषि मुनि होते थे बड़े-बड़े ग्रंथ लिख डालते थे और उनकी स्मरण शक्ति इतनी कमाल की होती थी उनको बड़े-बड़े स्तोत्र स्थितियां और पूरे पूरे जैसे रावण के विषय में मशहूर है कि उनको चारों वेद कंठ थे।
○क्या आपने कभी यह सोचा है कि ऐसा क्यों होता था वह ऐसा क्या खाते थे ऐसी कौन सी क्रिया थी जो वह जानते थे लेकिन उसके पीछे एक राज है तो आज मैं वह राज आपको बताता हूं योग मंत्र साधना और सरस्वती साधना प्राचीन समय से ही सनातन में
○सरस्वती साधना का एक विशेष महत्व रहा है बुद्धि की देवी होने के साथ-साथ स्मरण शक्ति भी इनकी साधना से साधक में बहुत ज्यादा आ जाती है। बस यही एक समझने वाली बात है।
○आजकल बहुत ज्यादा प्रतिस्पर्धा का जमाना है। हम बच्चों को हजारों लाखों रुपए लगाकर के अलग-अलग ट्यूशन लगा कर ये भरसक प्रयास करते हैं कि हमारे बच्चे अच्छे रोजगार की तरफ जाएं और कमाने का सही अवसर मिले ।लेकिन उसके लिए मौजूदा समय में बहुत ज्यादा दिक्कत पेश आती है कई बच्चों की स्मरण शक्ति बहुत कमजोर होती है।और बहुत याद करने पर भी उनको पढ़ा हुआ याद नहीं होता ।
○विदेश यात्रा के लिए लोग करोड़ों रुपए खर्च कर देते हैं क्योंकि कुछ देशों में लिखित परीक्षा के बाद ही अनुमति पत्र प्राप्त होता है लेकिन उसमें भी यह दिक्कत होती है कि जब कोई बच्चा परीक्षा दे और उसे परीक्षा के समय कुछ याद ना रहे और वह सही से परीक्षा ना कर पाए तो सारे पैसे पर पानी फिर जाता है।
○जो बच्चे उच्च शिक्षा के हेतु प्रयास करते हैं और अपना पाठ्यक्रम पढ़ते हैं और वह बच्चे जो व्यवसायिक परीक्षाएं देते हैं और बार-बार परीक्षाएं देने पर फेल हो जाते हैं ।
○स्कूल से लेकर के कितनी भी बड़ी जटिल से जटिल पढ़ाई हो जो साधक शुद्ध भाव से और स्वच्छ आचरण से रहता हुआ एक बार इस साधना को कर लेगा उसको जीवन में कभी भी लिखित या मौखिक परीक्षा देने में कभी भी कठिनाई नहीं आएगी।
○भगवती आदिशक्ति सरस्वती वाक वाणी और बुद्धि की देवी है और इनकी साधना करने से साधक की समरण शक्ति गजब सी हो जाती है ।
○मंत्र शक्ति का पाठ और दैविक शक्तियों का पार आज तक कोई पा नहीं सका आप भी ज्ञान भी यह मान चुका है कि मंत्रों का प्रभाव होता है।
○इसलिए मैं आपको एक ऐसा मंत्र दे जान देने जा रहा हूं जो साधक इस मंत्र का अनुष्ठान कर लेगा उसको पढ़ाई में कभी कोई दिक्कत या परेशानी नहीं होगी
○ यह अनुष्ठान 40 दिन का है
○ इस अनुष्ठान में ब्रह्मचारी व्रत का पूर्णतया पालन करना चाहिए।
○ 11 माला इस मंत्र का जाप प्रतिदिन किया जाता है।
○ एक एकांत कमरे में जिसमें बहुत अधिक सामान न रखा हो उसमें यह जाप होता है।
○उत्तर दिशा की ओर मुंह करके जाप किया जाता है
○ इस साधना में कंबल के आसन का प्रयोग होता है और सफेद रंग के वस्त्र धारण करने होते हैं।
○ सफेद रंग की हकीक की माला का प्रयोग जाप में होता है या आप रुद्राक्ष की माला भी ले सकते हैं।
○ एक आम की लकड़ी के पटरी पर सवा मीटर सफेद रंग का नया कपड़ा बिछाकर कल स्थापित करें।
○ सरस्वती मां के चित्र को या प्रतिमा को सफेद रंग के फूलों से सुसज्जित करके उस तख्ते पर रखें।
○ साधना काल में शुद्ध देसी घी के दीपक को लगाना परम आवश्यक है।
○ साधना काल में जब आप जाप करें वहां पर एक पात्र में शुद्ध जल अवश्य रखें।
○ पूजा में सफेद रंग की मिठाई और फूल भी सफेद रंग के होने चाहिए।
○ पहले दिन ही मां भगवती को अपनी प्रार्थना बोल कर पाठ को आरंभ करना चाहिए।
○ साधना में किसी भी प्राप्त अनुभव को केवल अपने तक ही रखें या केवल अपने गुरु को बताएं उसके अलावा साधना के बारे में या उस साधना में आपको जो अनुभव हुए हैं वह किसी से ना कहें।
○ साधना काल में मांस मछली शराब अंडा गोश्त प्याज लहसुन सब चीजें वर्जित हैं।
○ साधना काल में कंघी करना नाखून तराशना सेव करना सुगंधित पदार्थ क्रीम पाउडर खुशबूदार साबुन या खुशबूदार तेल इत्यादि लगाना साधना काल में वर्जित होता है।
○ जो वस्त्र साधना काल में पहने जाएंगे जब आप पाठ करने के लिए बैठोगे सिर्फ उसी समय पहनने हैं उसके बाद आप उन कपड़ों को उतारकर के अलग कहीं सुरक्षित रख दें दूसरे दिन सिर्फ पाठ के समय पहने और पूरा समाज इतने दिन भी आप पाठ करोगे उस वस्त्र को धोना नहीं है वापस पूजा के समय ही उसको पहनना है।
○ इस पूजा के समय जो सामान चढ़ाना है एक जोड़ा मौली, सफेद रंग की मिठाई, जोड़ा सबूत सुपारी
,गयारह फूल सफेद रंग के, मिश्री सूखे मेवे जोड़ा मीठे
पान,सात लौंग सात छोटी इलायची।
○यह जितना भी समान आप रखेंगे इस सम्मान को अगर आप पहले दिन रख रहे हो तो दूसरे दिन उसको उठाकर जल प्रवाहित कर देना है।
○ जो जल का पात्र आप वहां रखोगे उसे भी चौबीस घंटे बाद किसी वृक्ष या पेड़ पौधे की जड़ में डाल देना है।
○ जब आप आसन पर बैठे हो तो आश्रम मंत्र को 11 बार पढ़कर नमस्कार करके फिर आसन पर बैठना है।
आसन का मंत्र इस प्रकार है:-
सत् नमो आदेश गुरूजी को आदेश।आसन ब्रह्मा आसन इन्द्र,आसन बैठे गुरु गोविन्द ,आसन बैठे जपिये जाप,
कोटि जन्म के उतरें पाप,आसन बैठे सिंघासन बैठे,
बैठे गुर की छाया पांच तत्ले आसन पर बैठे गुरु ने शब्द बताया,जो जाने आसन जाप उसका मुख देखे उतरे पाप,
जो ना जाने आसन का जाप उसका मुख देखे लागे पाप,
कहो संतो हम गुरु के दास,इतना आसन मन्त्र पूर्ण भया,
सत की गद्दी बैठ गुरुगोरख जी कहा, गुरूजी को आदेश आदेश।।
○इसके बाद आपको नीचे दिए गए मन्त्र का गयारह माला जाप करना है जितनी आपने क्षमता हो कम से कम गयारह माला अगर करेंगे तो साधना में असफल होने का कोई भी चांस नहीं रहेगा।
○सरस्वती माता का मंत्र इस प्रकार है:- बिस्मिल्लाह रहमान रहीम घट्ट में सुरसती जुबां पे तालीम सिर पर पंजा पीर उस्ताद का साबुत रख यकीन मोहम्मद रसूलल्लाह मरे जिन्दे फ़क़्क़रा नु ऐश करन ला या करीमा करम कर करम कर इलाही मोहम्मद कल की बात बता दे देखूं तेरी खुदाई।
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मंगलवार, 15 अक्टूबर 2019
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