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बुधवार, 3 नवंबर 2021

वशीकरण

आज हर साधक वास्तविक और प्रमाणिक तंत्र मंत्र की साधनाओं की तलाश करता है हर आदमी को आगे बढ़ने के लिए किसी किसी शक्ति की सहायता की आवश्यकता होती है जिसको कभी नाकारा नही जा सकता ऐसी विधि जो अचूक हो भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए आदि काल से ही तंत्र एक बहुत उत्तम माध्यम रहा है भौतिक संसार के हर कठिन से कठिन कार्य को तंत्र मंत्र की युक्ति से कुछ ही समय में आसानी से सिद्ध किया जा सकता है 

उचित कार्य में यदि तांत्रिक क्रियाओं का सहारा लिया जाए और बिना किसी प्राणी को कष्ट दिए अपने कार्य को सिद्ध कर लिया जाए तो कोई बुरी बात नही है कई बार वशीकरण एक दवा का काम कर जाता है जो आपसी पारिवारिक संघर्ष से सदस्यों को बचा देता है कम मात्रा में ज़हर भी दवा बन जाता है और अधिक मात्रा में जीवन रक्षक दवा भी प्राणघातक होती है

आपके कर्म आपने खुद के हाथों में ही होते हैं यानि आपका भविष्य आपके कर्मों पर पूरी तरह से निर्भर करता है

आज आपको एक ऐसे प्रयोग से अवगत करवाने जा रहा हूँ  जो कि सिर्फ एक दिन में ही सिद्ध हो जाता है और इसके परिणाम कई बार प्राप्त किये गए हैं

बेशक बहुत सी पुस्तकों में यह प्रयोग दिया गया है लेकिन इसके बारे में वही साधक आपको जिसने इस प्रयोग को किया होगा इस प्रयोग में काजल तैयार किया जाता है और कई बार इसके सफलता पूर्वक परिणाम भी प्राप्त किये है

किसी भी पर्व काल को सभसे पहले अपामार्ग को एक सुपारी पैसा कुछ अक्षत और हल्दी से निमंत्रण दे दें फिर उसी रात्रि में इस मन्त्र को जपते हुए  चुपचाप उस अपामार्ग' की टहनी तोड़ लाएं और घर के एकांत में सवा हाथ जमीन पर गाय के गोबर से गोल चौंका लगाए फिर उस टहनी पर रुई लपेट कर दीये में जलाएँ। उसके साथ एक जलपात्र रखें   
11 फूल अड़हुल या गुलाब के धरें धूफ सुलगाएँ सेंट बतासा लौंग इलायची 7 प्रकार की मिठाई एक जोड़ा जनेऊ धरें    तिल, सरसों के तेल में चमेली के तेल मिलाकर मिट्टी के दिये में जलाकर  इसका काजल तैयार कर लें। जब तक काजल बनता रहे, मंत्र का जाप करते साधक के वस्त्र और आसान लाल होगें जबकि माला रुद्राक्ष की होगी जब तक दिया जलता रहेगा जाप करते रहें।

प्रयोग
जब भी आवश्यकता हो सात बार इस मन्त्र का जाप करके
इस काजल को नेत्रों में आंजें। इस प्रयोग से पूरा का
गाँव या शहर ही साधक के अनुकूलित हो जाता है।


मन्त्र :-
नमः पद्मनी । 
अञ्जन मेरा नाम । 
इस नगरी में बैठके मोहूं सगरा गाम । 
मोहु पनघट को पनिहार । 
इस नगर को छत्तीस मोहूं पवन बयार । 
जो कोई मार मार करन्ता आवे । 
ताही नरसिंह वीर बायां पग के अंगूठा ।
तले गेर आवे । 
राज करन्ता राजा मोहूं । 
गद्दी बैठा बनिया मोहूं ।
मेरी भक्ति गुरू की शक्ति । 
फुरो मन्त्र ईश्वरोवाचा ।

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